LPG सप्लाई पर कंपनियों का कोटा तय : गैस एजेंसियों को 20 से 25 % कम सिलेंडर की हो रही सप्लाई, लोग परेशान…. संडे को देशभर के बॉटलिंग प्लांट रहेंगे बंद

LPG सप्लाई पर कंपनियों का कोटा तय : गैस एजेंसियों को 20 से 25 % कम सिलेंडर की हो रही सप्लाई, लोग परेशान…. संडे को देशभर के बॉटलिंग प्लांट रहेंगे बंद

रायपुर। अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर देशभर में देखने मिल रहा। छत्तीसगढ़ समेत कई राज्यों में एलपीजी गैस सिलेंडर की कमी से लोग परेशान हैं। गैस एजेंसियों के बाहर लोगों की लंबी कतारें लग रही हैं। सूत्रों के मुताबिक गैस एजेंसियों को मिलने वाली सप्लाई पर अब कंपनियों ने कोटा तय कर दिया है। इसके चलते हालात सामान्य होने में अभी समय लग सकता है। रविवार को देशभर के एलपीजी बॉटलिंग प्लांट बंद रहने से सप्लाई पर अतिरिक्त दबाव पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

एजेंसियों के मुताबिक गैस एजेंसियों को मिलने वाली सप्लाई पर अब कंपनियों ने कोटा तय कर दिया है। औसतन किसी एजेंसी की एक महीने की बिक्री करीब 10 हजार सिलेंडर मानी जाए तो फिलहाल उन्हें उसकी तुलना में लगभग 20 से 25 प्रतिशत कम सप्लाई दी जा रही है। यानी जहां पहले 10 हजार सिलेंडर की डिमांड और वितरण होता था, वहां अब करीब 7500 सिलेंडर ही एजेंसियों और डिस्ट्रीब्यूटर्स को उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

कंपनियों की ओर से साफ निर्देश दिए गए हैं कि तय कोटे से ज्यादा सिलेंडर की आपूर्ति फिलहाल संभव नहीं है। अगर किसी क्षेत्र में अतिरिक्त सप्लाई दी भी जाती है तो उसे एजेंसी की अगली मासिक आपूर्ति से एडजस्ट किया जाएगा। ऐसे में डिस्ट्रीब्यूटर्स और एजेंसियों के सामने सप्लाई मैनेजमेंट की चुनौती और बढ़ गई है।

पहले से ही कई जगहों पर मांग और सप्लाई के बीच बड़ा अंतर बना हुआ है। सूत्रों के मुताबिक कई डिस्ट्रीब्यूशन पॉइंट्स पर जहां रोजाना करीब 2500 सिलेंडर की मांग आ रही है, वहां फिलहाल करीब 500 सिलेंडर प्रतिदिन की ही आपूर्ति हो पा रही है। इसके कारण उपभोक्ताओं को सिलेंडर मिलने में औसतन 5 दिन तक का इंतजार करना पड़ रहा है और कई जगहों पर 5 से 6 दिन का बैकलॉग बन चुका है।

इस बीच आवश्यक सेवाओं को प्राथमिकता देने के निर्देश भी दिए गए हैं। स्कूल, अस्पताल, धार्मिक संस्थान, सीआरपीएफ कैंटीन और सेना जैसे संस्थानों को पहले गैस उपलब्ध कराई जा रही है, जिससे सामान्य घरेलू उपभोक्ताओं के लिए इंतजार और बढ़ सकता है। हालांकि सरकार और गैस कंपनियां स्थिति को संतुलित रखने की कोशिश कर रही है, लेकिन सीमित सप्लाई, कोटा सिस्टम और बढ़ती मांग के बीच जमीनी स्तर पर दबाव की स्थिति अभी भी बनी हुई है।

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