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छत्तीसगढ़ : पॉवर कंपनी को 6 हजार करोड़ का घाटा ! 24% टैरिफ बढ़ाने का प्रस्ताव, लग सकता है महंगी बिजली का झटका

छत्तीसगढ़ : पॉवर कंपनी को 6 हजार करोड़ का घाटा ! 24% टैरिफ बढ़ाने का प्रस्ताव, लग सकता है महंगी बिजली का झटका
रायपुर। नए सत्र 2026-27 के लिए बिजली का नया टैरिफ तय करने के लिए छत्तीसगढ़ राज्य बिजली नियामक आयोग में छत्तीसगढ़ राज्य पॉवर कंपनी ने जो याचिका लगाई है, उसमें छह हजार करोड़ का घाटा बताया गया है। ऐसे में यह तय है कि इस साल भी महंगी बिजली का झटका लगेगा। पिछली बार पॉवर कंपनी ने पांच हजार करोड़ का घाटा बताया था, इसको आयोग ने पांच सौ करोड़ माना था। इस बार आयोग जितना घाटा मानेगा, उसके हिसाब से नया टैरिफ तय होगा।
छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत कंपनी ने राज्य में बिजली की दरें बढ़ाने के लिए नया टैरिफ प्लान भी विद्युत नियामक आयोग में जमा किया है। प्रस्तावित टैरिफ में औसतन 24 प्रतिशत तक वृद्धि का सुझाव दिया गया है। विद्युत कंपनी के इस प्रस्ताव पर नियामक आयोग समीक्षा करेगी। साथ ही आम उपभोक्ताओं और संबंधित पक्षों से दावा-आपत्तियां आमंत्रित की जाएगी। आयोग द्वारा निर्धारित प्रक्रिया के तहत जनसुनवाई आयोजित की जाएगी, जिसमें उपभोक्ता अपनी राय और आपत्तियां दर्ज करा सकेंगे। जनसुनवाई के बाद नियामक आयोग अंतिम निर्णय लेगा।

नियमों के मुताबिक पॉवर कंपनी को दिसंबर माह में नए सत्र के टैरिफ के लिए याचिका लगानी रहती है। पॉवर कंपनी ने आयोग से 31 दिसंबर तक का समय याचिका लगाने के लिए मांगा था। इसके एक दिन पहले ही 30 दिसंबर को पॉवर कंपनी ने अपनी याचिका लगाई। इस याचिका में पूरा लेखा-जोखा देते हुए पॉवर कंपनी ने बताया है कि नए सत्र 2026-27 में उसको कितने का राजस्व मिलेगा और उसका खर्च कितना है। इस सत्र के फायदे के साथ पुराना घाटा भी बताया गया है। नए सत्र के फायदे को पुराने घाटे में कम करने के बाद भी पॉवर ने करीब छह हजार करोड़ के राजस्व की जरूरत बताते हुए टैरिफ में इजाफा करने की मांग रखी है।

पिछली बार आयोग ने 5000 करोड़ के घाटे को माना था पांच सौ करोड़

चल रहे वित्तीय वर्ष की बात करें तो पॉवर कंपनी ने नियामक आयोग में जो याचिका लगाई थी, उसमें करीब पांच हजार का घाटा बताया था, लेकिन आयोग ने इसको पांच सौ करोड़ माना था। कंपनी द्वारा मांग की गई वार्षिक राजस्व आवश्यकता 28397.64 करोड़ रुपए के स्थान पर 25636.38 करोड़ रुपए मान्य किया गया था। वितरण कंपनी द्वारा इस वित्तीय वर्ष के लिए अनुमानित विद्युत विक्रय 35727 मिलियन यूनिट के स्थान पर 36540 मिलियन यूनिट मान्य की गई थी। इसी तरह वितरण कंपनी द्वारा वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए विद्युत की अनुमानित बिक्री पर प्रचलित टैरिफ से अनुमानित 4947.41 करोड़ रुपए राजस्व घाटे के स्थान पर 523.43 करोड़ रुपए मान्य किया था। पॉवर कंपनी के घाटे को पूरा माना जाता तो दरें 20 फीसदी तक बढ़ानी पड़ती, लेकिन आयोग ने घाटे को पांच सौ करोड़ का माना था इसलिए दरें दो फीसदी से भी कम बढ़ाई गई थी। अब इस बार आयोग पॉवर कंपनी का कितना घाटा मानता है, उसके हिसाब से ही नया टैरिफ तय होगा।

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