
बिलासपुर. बिलासपुर हाईकोर्ट ने आज लंबे समय से आबकारी घोटाले मामले में जेल में बंद पूर्व आईएएस अधिकारी अनिल टुटेजा रायपुर महापौर रहे एजाज ढेबर के भाई और कारोबारी अनवर ढेबर को हाईकोर्ट ने जमानत प्रदान कर दी. जस्टिस अरविंद वर्मा की सिंगल बेंच ने यह आदेश जारी किया है. इस मामले में एडवोकेट हर्षवर्धन परगनिहा और शशांक मिश्रा ने पैरवी की.

छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की सरकार रहने के दौरान 3200 करोड़ रुपए के आबकारी घोटाले का मामला ईडी ने उजागर किया था. जिसके अनुसार शराब नीति बदलकर और नकली होलोग्राम बनाकर कुछ विशेष आपूर्ति कर्ताओं के माध्यम से तथा अधिकारियों और नेताओं का सिंडिकेट बनाकर 3200 करोड़ रुपए का घोटाला किया गया. नकली होलोग्राम लगे शराब की बोतलें सरकारी शराब दुकानों के माध्यम से बिकवाई गई. इस पर कोई भी टैक्स नहीं दिया गया. ईडी के बाद उनके पत्र के आधार पर आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो ने भी इस मामले में एफआईआर कायम की थी. इसमें पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा, पूर्व आईएएस अनिल टुटेजा, अनवर ढेबर, नितेश पुरोहित, अरविंद सिंह, दीपेंद्र चावला, सौम्या चौरसिया, आबकारी विभाग के 28 अधिकारी समेत अन्य आरोपी थे. 22 माह से पूर्व आईएएस अनिल टुटेजा और अनवर ढेबर समेत अन्य इस मामले में जेल में है.
सत्र न्यायालय में जमानत खारिज होने के बाद ढेबर, टुटेजा समेत अन्य ने बिलासपुर हाई कोर्ट में जमानत याचिका लगाई थी. बिलासपुर हाईकोर्ट से भी पूर्व में जमानत खारिज कर दी गई थी. जिसके बाद इन्होंने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था. सुप्रीम कोर्ट ने भी इनकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी. हालांकि पांच माह बाद इन्हें हाईकोर्ट में फिर से जमानत लगाने की लिबर्टी दी थी. पांच माह बाद हाईकोर्ट में इन्होंने फिर से जमानत याचिका लगाई. आरोपियों के पक्ष से अदालत में पैरवी कर रहे अधिवक्ता हर्षवर्धन परगनिहा ने बताया कि जस्टिस अरविंद वर्मा की सिंगल बेंच में मामले की पूर्व में सुनवाई हो चुकी थी और मामले को अदालत ने सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था. आज हाईकोर्ट का फैसला सामने आया है, जिसमें अनिल टुटेजा, अनवर ढेबर, यश पुरोहित, नितेश पुरोहित और दीपेंद्र चावला को आबकारी घोटाले में सिंगल बेंच ने जमानत प्रदान कर दी.
जेल से नहीं आ सकेंगे बाहर
अनवर ढेबर और अनिल टुटेजा को ईओडब्लू ने 550 करोड़ रुपए के डीएमएफ घोटाले में भी आरोपी बनाया है. इस मामले में जमानत नहीं होने के कारण ढेबर और टुटेजा जेल से बाहर नहीं आ पाएंगे. जबकि नितेश पुरोहित, दीपेंद्र चावला और यश पुरोहित जेल से बाहर आ जाएंगे.
क्या है शराब घोटाला ?
छत्तीसगढ़ में कांग्रेस सरकार के दौरान 2019 से 2023 तक शराब नीति को बदलकर चहेते सप्लायरों के माध्यम से शराब घोटाला हुआ. इसमें लाइसेंस की शर्तें ऐसी रखी गई कि चहेती कम्पनियों को काम मिल सके. उन कंपनियों ने नकली होलोग्राम और सील बनवाई. यह काम नोएडा की एक कंपनी ने किया. इसके बाद नकली होलोग्राम लगी शराब की महंगी बोतलें सरकारी दुकानों के माध्यम से बिक्री करवाई गई. चूंकि नकली होलोग्राम था तो बिक्री की जानकारी शासन को नहीं हो पाती थी और बिना एक्साइज टैक्स दिए शराब की बिक्री होती रही. इस तरह से शासन को 2165 करोड़ रुपए के टैक्स का चूना लगाया गया. यह रकम कांग्रेस भवन बनवाने से लेकर नेताओं,अधिकारियों और मंत्रियों तक बंटे.
शराब घोटाला मामले में अब तक पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल, पूर्व आईएएस अनिल टुटेजा, एजाज ढेबर के भाई अनवर ढेबर की गिरफ्तारी गई थी. इसके अलावा आबकारी विभाग के 28 आबकारी अधिकारी भी आरोपी बनाए गए थे, जिन्हें सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिल गई है.