छत्तीसगढ़ विधानसभा: राज्य की जेलों में एक साल में 66 बंदियों की मौत, 48 मामलों में जांच लंबित, गृहमंत्री ने सदन में दी जानकारी, आदिवासी नेता की मौत पर विपक्ष का हंगामा, वाकआउट

छत्तीसगढ़ विधानसभा: राज्य की जेलों में एक साल में 66 बंदियों की मौत, 48 मामलों में जांच लंबित, गृहमंत्री ने सदन में दी जानकारी, आदिवासी नेता की मौत पर विपक्ष का हंगामा, वाकआउट
रायपुर। छत्तीसगढ़ की केंद्रीय एवं जिला जेलों में जनवरी 2025 से 31 जनवरी 2026 तक कुल 66 बंदियों की कस्टोडियल डेथ हुई है। यह जानकारी विधानसभा के प्रश्नकाल के दौरान उप मुख्यमंत्री एवं गृहमंत्री विजय शर्मा ने दी। उन्होंने बताया कि 66 मामलों में से 18 प्रकरणों में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुरूप न्यायिक मजिस्ट्रेट जांच पूरी हो चुकी है, जबकि 48 मामलों में जांच की प्रक्रिया अभी जारी है। सदन में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने एक आदिवासी नेता की मौत को हत्या करार देते हुए मामले की जांच विधानसभा की समिति से कराने की मांग की। इस मुद्दे पर सदन में जमकर नारेबाजी हुई। विपक्षी सदस्यों ने सदन की कार्यवाही से वाकआउट कर दिया।

इससे पहले प्रश्नकाल के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आपत्ति जताते हुए कहा कि मृतकों के नाम और संबंधित जेलों का विवरण उपलब्ध नहीं कराया गया। उन्होंने पूछा कि क्या कवर्धा जेल में बंद पंकज साहू की कस्टोडियल डेथ इस सूची में शामिल है? साथ ही जीवन ठाकुर का मामला उठाते हुए कहा कि वे कांकेर जेल में बंद थे, लेकिन उनकी मृत्यु रायपुर में हुई। क्या यह प्रकरण भी 66 मामलों में शामिल है?

 

इस पर गृहमंत्री विजय शर्मा ने स्पष्ट किया कि पंकज साहू की मृत्यु मांगी गई अवधि से पहले की है, इसलिए वह इस आंकड़े में शामिल नहीं है। वहीं जीवन ठाकुर को कांकेर से न्यायालय की अनुमति के बाद रायपुर लाया गया था।

भूपेश बघेल ने कहा कि जीवन ठाकुर आदिवासी समाज के प्रमुख नेता थे और गंभीर बीमारियों से पीड़ित थे, लेकिन जेल में उन्हें समुचित उपचार नहीं मिला। उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी गिरफ्तारी के विरोध में आदिवासी समाज ने प्रदर्शन भी किया था।

गृहमंत्री ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि जीवन ठाकुर के खिलाफ फर्जी प्रमाण पत्र बनाने के प्रमाण मिलने पर कार्रवाई की गई थी। 12 अक्टूबर 2025 को उन्हें जेल लाया गया था। उन्हें शुगर की बीमारी थी और तबीयत बिगड़ने पर अस्पताल भेजा गया था, जहां परिजन उनसे मिलते रहे। उन्होंने यह भी बताया कि जेल अधीक्षक ने न्यायालय को सूचित किया था कि वे उपचार में सहयोग नहीं कर रहे थे। जेल अस्पताल की रिपोर्ट के अनुसार, शुगर के मरीज होने के बावजूद वे आवश्यक परहेज नहीं करते थे। इसके बाद न्यायालय के निर्देश पर उनका स्थानांतरण रायपुर किया गया।

इस पर भूपेश बघेल ने सवाल उठाया कि कोई भी शुगर का मरीज जानबूझकर अपनी हालत क्यों बिगाड़ेगा। उन्होंने यह भी कहा कि उस समय उनका बेटा भी उसी जेल में था, लेकिन दोनों को अलग रखा गया। उनका तर्क था कि बेटा बेहतर देखभाल कर सकता था। साथ ही कांग्रेस विधायकों को भी मिलने की अनुमति नहीं देने का आरोप लगाया।

भूपेश बघेल ने मामले की जांच विधानसभा की समिति से कराने की मांग की। इस पर गृहमंत्री ने कहा कि जब किसी मामले में पहले से मजिस्ट्रेट जांच चल रही हो, तो समानांतर जांच का औचित्य नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि हर व्यक्ति किसी न किसी समाज से जुड़ा होता है, इससे कानून की प्रक्रिया प्रभावित नहीं हो सकती।

पूर्व मुख्यमंत्री ने यह भी पूछा कि क्या नव्या मलिक का नाम इस सूची में शामिल है, जो कथित रूप से ड्रग रैकेट से जुड़ी थी। इस पर गृहमंत्री ने कहा कि वह इस संबंध में अलग से जानकारी प्राप्त कर अवगत कराएंगे।

पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने राज्य में हत्या, लूट और फिरौती जैसे जघन्य अपराधों में 35 प्रतिशत वृद्धि के संबंध में सवाल उठाया। गृहमंत्री विजय शर्मा ने जवाब दिया कि भाजपा सरकार के कार्यकाल में अपराधों में कमी आई है।

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