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CG Breaking : रायपुर नगर निगम में 100 करोड़ से ज्यादा का घोटाला! TNC और मार्ग संरचना अप्रूवल के नाम पर हुआ खेल, फाइलें गायब, जानिए क्या कहते हैं अधिकारी

Exclusive : रायपुर नगर निगम में 100 करोड़ से ज्यादा का घोटाला! TNC और मार्ग संरचना अप्रूवल के नाम पर हुआ खेल, फाइलें गायब, जानिए क्या कहते हैं अधिकारी

 रायपुर। रायपुर नगर निगम में 100 करोड़ रुपये से अधिक कथित घोटाले का मामला सामने आया है, जिससे हड़कंप मच गया है। TNC (टाउन एंड कंट्री प्लानिंग) और मार्ग संरचना अप्रूवल के नाम पर नियम-कानूनों को दरकिनार कर फाइलें पास करने और बाद में मूल दस्तावेज गायब होने के आरोप लगे हैं। मामले में प्रक्रिया को बायपास करने, 70 खसरा नंबर की फाइलें गायब होने और अधिकारियों-बिल्डरों की मिलीभगत जैसे गंभीर सवाल उठे हैं, जिस पर अब जांच के आदेश दिए गए हैं।

रायपुर नगर पालिक निगम में टाउन एंड कंट्री प्लानिंग (TNC) और मार्ग संरचना अप्रूवल प्रक्रिया में भारी अनियमितताओं का मामला सामने आया है। आरोप है कि 100 करोड़ रुपये से ज्यादा का घोटाला कर निजी बिल्डरों और दलालों को फायदा पहुंचाने के लिए पूरी प्रक्रिया को दरकिनार कर दिया गया है। मामले की भनक लगते ही 70 से ज्यादा खसरा नंबरों की मूल फाइलें गायब कर दी गईं।

अवैध कॉलोनियों को अवैध तरीके से वैध करने का षड्यंत्र

नेता प्रतिपक्ष आकाश तिवारी ने इस घोटाले को लेकर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि यह 100 करोड़ से अधिक का घोटाला है। दलाल, बिल्डरों और कुछ अधिकारियों की मिलीभगत से खेल खेला गया है। नियम-कानून और प्रक्रिया को तिलांजलि दे दी गई है। मामले की जानकारी होते ही मूल नस्ती गायब कर दी गई। अवैध कॉलोनियों को अवैध तरीके से वैध करने का एक बड़ा षड्यंत्र है।

घोटाले का केंद्र- बोरियाखुर्द, ओम नगर, साई नगर, बिलाल नगर

यह पूरा मामला कामरेड सुधीर मुखर्जी वार्ड क्रमांक 54 अंतर्गत आरडीए कॉलोनी से लगे बोरियाखुर्द, ओम नगर, साई नगर और बिलाल नगर क्षेत्र के भूखंडों से जुड़ा है। इनमें भूखंड क्रमांक 81, 82, 86 से लेकर 450 तक कुल 70 से अधिक खसरा नंबर, All of Part शामिल हैं।

प्रक्रिया कैसे बायपास की गई?

नियम के अनुसार अप्रूवल की प्रक्रिया इस प्रकार है—

जोन से फाइल निगम मुख्यालय आती है।
निगम कमिश्नर अप्रूवल देते हैं।
फिर टाउन एंड कंट्री प्लानिंग (TNC) विभाग भेजी जाती है।
TNC से वापस कमिश्नर के पास आती है और अंतिम अप्रूवल के बाद जोन को भेजी जाती है।

लेकिन इस मामले में जोन क्रमांक 10 से फाइल सीधे TNC विभाग पहुंचा दी गई। निगम कमिश्नर को पूरी तरह बायपास कर दिया गया। जब TNC से फाइल कमिश्नर के पास आई, तो उन्होंने हैरानी जताई कि यह फाइल तो उन्होंने अप्रूव ही नहीं की थी। इसके बाद जोन क्रमांक 10 से मूल नस्ती मंगवाई गई, तो पता चला कि मूल फाइल गायब हो चुकी है। जोन आयुक्त, जोन-10 ने नस्ती गुम होने का आधिकारिक पत्र भी लिखा है।

निगम कमिश्नर विश्वदीप का बयान

नगर निगम आयुक्त विश्वदीप ने मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया है। गड़बड़ियां सामने आई हैं। उन्होंने बताया कि तत्काल प्रभाव से मामले में कार्रवाई शुरू की गई है और पूरी जांच कराई जाएगी। जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

जोन-10 के आयुक्त ने भी मुख्यालय और अन्य जोनों को पत्र लिखकर गुम नस्ती की जानकारी दी है। पत्र में स्पष्ट रूप से उल्लेख है कि जोन कार्यालय में मूल नस्ती नहीं मिल रही है।

सिस्टमेटिक तरीके से किया गया घोटाला – नेता प्रतिपक्ष

नेता प्रतिपक्ष आकाश तिवारी ने इसे सिस्टमेटिक घोटाला करार दिया और मांग की कि मामले की उच्च स्तरीय जांच हो तथा दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि निजी ठेकेदारों को अनुचित फायदा पहुंचाने के लिए जानबूझकर प्रक्रिया को तोड़ा गया। अगर कार्रवाई नहीं होती है और जिम्मेदार लोगों को बचाने की कोशिश होती है, तो वे इस मामले को कोर्ट में लेकर जाएंगे।

यह मामला रायपुर नगर निगम में पारदर्शिता और प्रशासनिक जवाबदेही पर सवाल खड़ा कर रहा है। जांच रिपोर्ट का इंतजार है, लेकिन फिलहाल फाइल गुम होना और प्रक्रिया बायपास करना एक गंभीर, सुनियोजित षड्यंत्र की ओर इशारा करता है।

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