रायपुर। रायपुर नगर निगम की मेयर इन काउंसिल (MIC) की बैठक बुधवार को संपन्न हुई, जिसमें शहर विकास, पेयजल व्यवस्था, निर्माण कार्यों और जनसुविधाओं से जुड़े कुल 18 एजेंडों पर चर्चा कर महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। बैठक के बाद महापौर मीनल चौबे ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि जर्जर हो चुकी पुरानी नगर निगम बिल्डिंग के पुनर्विकास को लेकर निगम गंभीरता से काम शुरू करने जा रहा है। इसके लिए कमर्शियल मॉडल पर परियोजना विकसित करने की तैयारी की जा रही है। शहर में लगातार गहराते पेयजल संकट पर चर्चा को लेकर भी मीनल चौबे ने जानकारी साझा की।
महापौर मीनल चौबे ने कहा कि पुरानी निगम भवन की स्थिति काफी खराब हो चुकी है, इसलिए उस स्थल के बेहतर उपयोग और पुनर्विकास पर विचार किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि परियोजना को पीपीपी मॉडल (PPP Model) के तहत विकसित करने की योजना है। इसके लिए जनप्रतिनिधियों और आम जनता से चर्चा के बाद अंतिम स्वरूप तय किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि नवीन मार्केट क्षेत्र के विकास को लेकर भी निगम काम करेगा। हालांकि पुरानी निगम बिल्डिंग में निर्माण को लेकर ज्यादा तकनीकी दिक्कतें नहीं हैं, लेकिन नवीन मार्केट क्षेत्र में कुछ चुनौतियां हैं, जिन पर विचार-विमर्श कर आगे निर्णय लिया जाएगा।
बैठक में प्राथमिकता वाले निर्माण कार्यों के लिए संकल्प सोसायटी के माध्यम से करीब 10 लाख रुपये की स्वीकृति भी दी गई। इसके अलावा खेल एवं कल्याण विभाग से जुड़े प्रस्तावों पर भी राशि मंजूर की गई।
आमानाका क्षेत्र में प्रस्तावित गार्बेज डिपो परियोजना को लेकर भी बैठक में चर्चा हुई। महापौर मीनल चौबे ने बताया कि इस संबंध में पहले से एमओयू किया जा चुका है, जिसकी अवधि 31 अक्टूबर 2026 तक है। अब इस विषय को MIC में लाया गया है और नियमानुसार नगर निगम आगे अनुमति प्रदान करेगा।
बैठक में महादेव घाट के जीर्णोद्धार प्रस्ताव को भी मंजूरी दी गई। वहीं शहीद आकाश राव गिरपुंजे के परिवार से जुड़े विषय पर भी चर्चा हुई। महापौर मीनल चौबे ने कहा कि शहीदों से बढ़कर कुछ नहीं होता और निगम परिवार की भावनाओं का पूरा सम्मान करेगा। उन्होंने बताया कि शहीद आकाश राव गिरपुंजे की प्रतिमा लाखे नगर चौक में स्थापित करने का प्रस्ताव भी सामने आया है।
शहर में लगातार गहराते पेयजल संकट को लेकर मेयर ने कही ये बात
शहर में लगातार गहराते पेयजल संकट को लेकर भी MIC बैठक में गंभीर चर्चा हुई। महापौर मीनल चौबे ने कहा कि पानी की समस्या केवल दो-चार दिनों की नहीं है, बल्कि भूजल स्तर लगातार नीचे जाने से हालात चिंताजनक होते जा रहे हैं। नगर निगम इस मुद्दे पर लगातार समीक्षा बैठकें कर रहा है और व्यवहारिक प्रस्तावों को MIC की स्वीकृति के बाद लागू किया जा रहा है।
महापौर चौबे ने कहा कि शहर का बड़ा हिस्सा अब भी पेयजल के लिए भूजल पर निर्भर है, इसलिए समस्या का समाधान तुरंत संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि निगम लगातार जल संकट को लेकर बैठकें कर रहा है और हर स्तर पर समाधान तलाशने का प्रयास जारी है।