“CM योगी आदित्यनाथ असली हिंदू नहीं”… शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने दिया बड़ा बयान

“CM योगी आदित्यनाथ असली हिंदू नहीं”… शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने दिया बड़ा बयान

बिलासपुर. छत्तीसगढ़ दौरे पर पहुंचे ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को लेकर बड़ा बयान दिया है. शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि मुख्यमंत्री (योगी आदित्यनाथ) को असली हिंदू साबित करने के लिए 40 दिन का समय दिया था, वे साबित नहीं कर पाए. इसलिए प्रमाणित हो गया, वे असली हिन्दू नहीं है.

केवल वोट लेने की नियत, लेकिन हिन्दुओं का काम करने की नहीं : शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद 

 

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि उनका किसी से कोई मतभेद नहीं है. हां लेकिन कोई गाय के सरंक्षण की बात कहकर वोट लेगा, और वह गौ रक्षा नहीं कर पाएगा, तो बिल्कुल इसके विरोध में आवाज उठाएंगे. नियत में भेद है, उनकी नियत केवल वोट लेने की है. हिंदुओं का काम करने की नियत नहीं है. अगर मंशा होती तो 9 साल में सरकार में है, वह इसके लिए काम करते. लेकिन गौ माता की हालत बहुत खराब है.

गौ रक्षा के दावे पर शंकराचार्य ने कहा कि कथनी और करनी में फर्क है. कथनी कुछ और है, करनी कुछ औऱ है. इसलिए मंच पर माइक जब मिलता है. राजनेता बोलते कुछ और हैं, लेकिन धरातल पर काम देखें तो कुछ अलग ही दिखाई देता है.

 

शंकराचार्य ने उन्हें टार्गेट करने का लगाया आरोप

सत्तारूढ़ पार्टियों पर शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद बड़ा आरोप लगाया कि उनकी आवाज बंद करने के लिए हिस्ट्रीशीटरों का सत्तारूढ़ पार्टियां उपयोग कर रही हैं. वह सवाल उठा रहे हैं, इसलिए उन्हें टार्गेट किया जा रहा है.

 

शंकराचार्य ने कहा कि सनातन खतरे में है, लेकिन…

क्या सनातन खतरे में हैं, या फिर यह राजनीतिक षडयंत्र है, इस सवाल पर शंकराचार्य ने कहा कि सनातन खतरे में है, लेकिन किसी और से नहीं सनातन में घुल मिल रहे कालनेमियों से है.

सत्ता के करीब होने वाला संत नहीं : शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद 

शंकराचार्य ने सत्ता के करीब रहने वाले संतो पर तीखा टिपण्णी की है. उन्होंने कहा कि संत समाज के लोग ही सत्य के करीब होने चाहिए, सत्ता के करीब होने वाला संत नहीं हो सकता.

 

UGC के नए कानून पर शंकराचार्य का बयान 

यूजीसी के नए कानून को लेकर शंकराचार्य ने कहा कि यह हिंदुओं को बांटने वाला कानून है. इसका किसी भी दशा में क्रियान्वयन नहीं होना चाहिए.

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