
गृह मंत्रालय का पत्र
राज्यों के गवर्नर और केंद्र शासित प्रदेशों के लेफ्टिनेंट गवर्नर के मुख्यसचिव या सचिव को लिखे एक पत्र में गृह मंत्रालय ने पिछले साल हुई राज्यपालों की कॉन्फ्रेंस में दिए गए सुझाव का जिक्र किया है। जिसमें राजभवन का नाम बदलकर लोकभवन कर दिया जाए क्योंकि राजभवन शब्द से कॉलोनियलिज़्म को दर्शाता है। गृह मंत्रालय के निर्देश में कहा गया है, इसलिए यह गुजारिश की जाती है कि सभी आधिकारिक कामों के लिए राज्यपाल और लेफ्टिनेंट गवर्नर के कार्यालयों का नाम ‘लोकभवन’ और ‘लोक निवास’ रखा जाए।
इन राज्यों ने बदले अपने राज भवनों के नाम
गृह मंत्रालय के निर्देशों के बाद राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने अपने कार्यालयों से ‘राज’ शब्द हटाना शुरू कर दिया है। पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल, असम, उत्तराखंड, ओडिशा, गुजरात और त्रिपुरा ने ‘राजभवन’ का नाम बदलकर ‘लोकभवन’ कर दिया है। लद्दाख के राज निवास का नाम बदलकर ‘लोक निवास’ कर दिया गया है। इस सूची में एक और राज्य जुड़ गया है। राजस्थान ने भी राजभवन का नाम बदलने का एलान कर दिया है।
अंग्रेजों की निशानियों को मिटाने पर जोर
नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद से ही उपनिवेशकालीन शाही ठिकानों की छवि को बदलने की कोशिश जारी है। इसी क्रम में कुछ दिन पहले राजभवनों का नाम बदलकर को लोकभवन कर दिया गया था। सिर्फ नाम परिवर्तन नहीं, बल्कि पिछले एक दशक में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा सार्वजनिक पदों की भावना को पुनर्परिभाषित करने की व्यापक पहल का हिस्सा है।
2016 में हुई शुरुआत
इसकी शुरुआत 2016 में हुई थी, जब प्रधानमंत्री मोदी ने अपने आवास का नाम 7, रेस कोर्स रोड से बदलकर 7, लोक कल्याण मार्ग कर दिया था। इसके बाद एक कड़ी सी शुरू हो गई। 2022 में राज पथ का नाम बदलकर कर्तव्य पथ कर दिया गया।
भारत के प्रशासनिक केंद्र में अब सेंट्रल सेक्रेटेरिएट नहीं, बल्कि कर्तव्य भवन है। सरकार के अनुसार यह बदलाव छवि निर्माण नहीं बल्कि शासन की सोच में परिवर्तन का प्रतीक है- सत्ता, नियंत्रण और दूरी के पुराने संकेतों को हटाकर सेवा, कर्तव्य और जवाबदेही को केंद्र में लाना।