PM Modi Inaugurates New Building of Chhattisgarh Vidhan Sabha : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अंचल के पुरखों को किया नमन, कहा- छत्तीसगढ़ अपने स्वप्न के नए शिखर पर खड़ा है… यह एक इमारत का समारोह नहीं, जनगौरव का उत्सव है

PM Modi Inaugurates New Building of Chhattisgarh Vidhan Sabha : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अंचल के पुरखों को किया नमन, कहा- छत्तीसगढ़ अपने स्वप्न के नए शिखर पर खड़ा है… यह एक इमारत का समारोह नहीं, जनगौरव का उत्सव है

PM Modi Inaugurates New Building of Chhattisgarh Vidhan Sabha : रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्योत्सव के ऐतिहासिक अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज नवा रायपुर स्थित नवीन विधानसभा भवन का लोकार्पण किया। इस दौरान कार्यक्रम में मंच पर पीएम मोदी के साथ लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला, राज्यपाल रामेन डेका, विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह, नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरण दास महंत मौजूद रहे।

पीएम मोदी का संबोधन

लोकार्पण (PM Modi Inaugurates New Building of Chhattisgarh Vidhan Sabha) के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने जनता को संबोधित करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ की विकास यात्रा के लिए आज का दिन एक स्वर्णिम शुरुआत का दिन है और मेरे लिए व्यक्तिगत तौर पर यह बहुत ही सुखद दिन है, अहम दिन है। मेरा बीते कई दशकों से इस भूमि से बहुत आत्मीय नाता रहा है। एक कार्यकर्ता के रूप में मैंने छत्तीसगढ़ में बहुत समय बिताया। यहां से मुझे बहुत कुछ सीखने को मिला। मेरे जीवन को गढ़ने में यहां के लोगों का, यहां की भूमि का बहुत बड़ा आशीर्वाद रहा है। छत्तीसगढ़ की परिकल्पना और इसके निर्माण का संकल्प और फिर इस संकल्प की सिद्धि हर एक क्षण पर मैं छत्तीसगढ़ में परिवर्तन का साक्षी रहा हूं। आज जब छत्तीसगढ़ 25 साल की यात्रा के अहम पड़ाव पर पहुंचा है, तो मुझे इस क्षण का भी सहभागी बनने का अवसर मिला है। आज इस रजत जयंती के उत्सव पर मुझे राज्य के लोगों के लिए इस नई विधानसभा का लोकार्पण करने का सौभाग्य मिला है। मैं छत्तीसगढ़ के लोगों को और राज्य सरकार को इस अवसर पर शुभकामनाएं और बधाई देता हूं।

पीएम मोदी ने कहा कि 2025 का यह साल भारतीय गणतंत्र का अमृत वर्ष भी है। 75 साल पहले भारत ने अपना संविधान देशवासियों को समर्पित किया था। ऐसे में आज इस ऐतिहासिक अवसर पर मैं इस अंचल से संविधान सभा के सदस्य रहे रविशंकर शुक्ल, बैरिस्टर ठाकुर छेदीलाल, घनश्याम सिंह गुप्त, ईश्वरी मोहन त्रिपाठी, रामप्रसाद पोटाई और रघुराज सिंह जैसे महापुरुषों को स्मरण करते हुए उन्हें अपनी श्रद्धांजलि देता हूं। तब के काफी पिछड़े रहे इस क्षेत्र से दिल्ली पहुंचकर इन विभूतियों ने बाबा साहेब के नेतृत्व में संविधान के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। आज का दिन छत्तीसगढ़ के इतिहास का स्वर्णिम अध्याय बनकर चमक रहा है।

आज जब हम इस भव्य और आधुनिक विधानसभा भवन का लोकार्पण कर रहे हैं, तो यह केवल एक इमारत का समारोह नहीं, बल्कि 25 वर्षों की जन-आकांक्षा, जन-संघर्ष और जन-गौरव का उत्सव बन गया है। आज छत्तीसगढ़ अपने स्वप्न के नए शिखर पर खड़ा है और इस गौरवशाली क्षण में मैं उन महापुरुषों को नमन करता हूं जिनकी दूरदृष्टि और करुणा ने इस राज्य की स्थापना की। वो महापुरुष हैं भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी। साल 2000 में जब अटल जी ने छत्तीसगढ़ राज्य का गठन किया, तो वह निर्माण केवल प्रशासनिक नहीं था, वह निर्णय था विकास की नई राह खोलने का और वह निर्णय था छत्तीसगढ़ की आत्मा को पहचान दिलाने का। इसलिए आज जब इस भव्य विधानसभा के साथ-साथ अटल जी की प्रतिमा का भी अनावरण हुआ है, तो मन कह उठता है मेरे भाव व्यक्त हो रहे हैं। अटल जी जहां भी हों… अटल देखिये आपका सपना साकार हो रहा है। आपका बनाया हुआ छत्तीसगढ़ आज आत्मविश्वास से भरा हुआ है, विकास की नई ऊंचाइयों को छू रहा है।

छत्तीसगढ़ विधानसभा का इतिहास अपने आप में प्रेरणा स्रोत है। 2000 में जब इस सुंदर राज्य की स्थापना हुई तो पहली विधानसभा की बैठक राजकुमार कॉलेज (रायपुर) के जशपुर हॉल में हुई थी। वह समय सीमित संसाधनों का तो था लेकिन असीम सपनों का था। तब केवल एक भावना थी कि हम अपने भाग्य को और तेजी से उज्ज्वल बनाएंगे। बाद में विधानसभा को जो भवन तैयार हुआ वह भी पहले किसी दूसरे विभाग का परिसर था। वहीं से छत्तीसगढ़ में लोकतंत्र की यात्रा नई ऊर्जा के साथ प्रारंभ हुई और आज 25 वर्षों के बाद वही लोकतंत्र, वही जनता एक आधुनिक, डिजिटल और आत्मनिर्भर विधानसभा भवन का उद्घाटन कर रही है। यहां लिए गए निर्णय दशकों तक छत्तीसगढ़ के भाग्य को दिशा देंगे।

 

उन्होंने कहा कि मुझे विश्वास है यह भवन आने वाले दशकों के लिए छत्तीसगढ़ की नीति, नियति और नीतिकारों का केंद्र बनेगा। आज पूरा देश विरासत और विकास को साथ लेकर चल रहा है, और यह भावना सरकार की हर नीति और निर्णय में भी दिखती है। आज देश की संसद को हमारा पवित्र सेंगोल प्रेरणा देता है। नई संसद की नई गैलरियां पूरी दुनिया को भारत के लोकतंत्र की प्राचीनता से जोड़ती हैं। संसद परिसर में लगी प्रतिमाएं पूरे विश्व को बताती हैं कि भारत में लोकतंत्र की जड़ कितनी गहरी है।

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