छत्तीसगढ़ में हापा एक्सप्रेस हादसा: सीनियर सेक्शन इंजीनियर और मेट को रेलवे ने किया निलंबित… और अधिकारियों पर भी गिर सकती है गाज

छत्तीसगढ़ में हापा एक्सप्रेस हादसा: सीनियर सेक्शन इंजीनियर और मेट को रेलवे ने किया निलंबित… और अधिकारियों पर भी गिर सकती है गाज
रायपुर/ बिलासपुर. पोरबंदर-शालीमार हापा एक्सप्रेस (12905) के रेलडाली से टकराने के मामले में रेलवे ने बड़ी कार्रवाई की है. एसएसई (सीनियर सेक्शन इंजीनियर) प्रदीप मिंज व मेट संतराम को निलंबित कर दिया गया है. रेल प्रशासन की इस त्वरित कार्रवाई से हड़कंप मच गया है. मामले में कुछ और कर्मचारियों व अधिकारियों पर कार्रवाई की गाज गिर सकती है.

घटना शुक्रवार की शाम पांच बजे की है. पोरबंदर-शालीमार हापा एक्सप्रेस डाउन लाइन पर हावड़ा की ओर जा रही थी. जयरामनगर से लटिया के बीच किमी 698/20ए-698/18 ए के बीच पहुंची, तभी ट्रेन चालक की नजर वहां इंजीनियरिंग विभाग के कर्मचारियों पर पड़ी. कर्मचारी रेलडाली से कुछ सामान ढो रहे थे. उन्हें ट्रैक से हटाने के लिए सीटी भी बजाई गई. बार-बार सीटी बजाने के बाद भी कर्मचारी नहीं हटे और न ही रेलडाली हटाई गई. चालक ने आनन-फानन में आपातकालीन ब्रेक लगाकर ट्रेन को रोकने का प्रयास किया. लेकिन, इसके बाद भी रेलडाली से टकराने के बाद ट्रेन खड़ी हुई. इस घटना में किसी तरह जनहानि तो नहीं हुई.

लेकिन, रेल प्रशासन की नजर में यह बेहद गंभीर मामला है. एक तरह हजारों यात्रियों की जान से खिलवाड़ है. यही कारण है कि ट्रेन चालक के घटना को लेकर अकलतरा में मेमो देने के बाद तत्काल चार सदस्यीय टीम बनाकर जांच करने के निर्देश दिए. जांच में यह निष्कर्ष निकला कि घटना मेट संतराम की लापरवाही के कारण हुई है. इस घटना के लिए मेट संतराम और मुंशी के अलावा मौके पर मौजूद सभी कर्मचारी जिम्मेदार हैं. चूंकि सीनियर सेक्शन इंजीनियर प्रदीप मिंज के दिशा-निर्देश पर संतराम के द्वारा काम कराया जा रहा था. वहीं लगभग तीन बजे सीनियर सेक्शन इंजीनियर मिंज मेट संत राम को आवश्यक दिशा-निर्देश देकर घटना स्थल से कुछ दूर दूसरे कार्य का निरीक्षण करने के लिए चले गए.

कहीं न कहीं उनकी भी लापरवाही सामने आई है. यही कारण ही प्रथम दृष्टया सीनियर सेक्शन इंजीनियर व मेट की लापरवाही सामने आने के कारण रेल प्रशासन दोनों के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की है. इधर अधिकारियों की टीम भी मामले की जांच कर रही है. पूरी जांच रिपोर्ट के बाद इंजीनियरिंग विभाग के कुछ और अधिकारी व कर्मचारी भी कार्रवाई की जद में आ सकते हैं.

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